लॉक डाउन में प्रदूषण हुआ कम, दमा के मरीजों को मिली राहत - दमा के मरीजों को इंहेलर व दवाई से दी राहत माई सिटी रिपोर्टर गाजियाबाद। लॉकडाउन में प्रदूषण की कमी आने और मरीजों के घर में रहने से राहत भी खूब मिल रही है। कई साल बाद वातावरण में इतना सुधार हुआ कि अब पंप और मशीन के बगैर भी दमा रोगियों की सांसें चलने लगी हैं। इस बात को डाक्टर भी स्वीकार कर रहे हैं कि कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए पूरे देश में लॉकडाउन अस्थमा मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ है। इसके अलावा गेहूं की कटाई के बाद बारिश होने से भी प्रदूषण में कमी होने से मरीजों को राहत मिली है। अस्थमा के प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष मई के दूसरे मंगलवार को अस्थमा दिवस मनाया जाता है। अस्थमा रोग के लक्षण व कारण : अस्थमा रोग फे फड़ों से संबंधित है। कफ बना रहना, बलगम आना, सांस लेने में आवाज करना और सीने में खिचाव पैदा होना इसका लक्षण है। गेहूं की कटाई करने वाले लोगों और प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने के कारण ज्यादातर लोग अस्थमा से ग्रसित हो जाते हैं। बुजुर्गों के साथ ही यह बीमारी अब युवाओं और बच्चों को भी अपना शिकार बनाने लगी है। अस्थमा के मरीज को सांस लेने और सांस छोड़ने में दिक्कत आती है। श्वास नली व अन्य नलिकाओं में सूजन व सिकुड़न आती है, जिसकी वजह से मरीज का दम फूलने लगता है। इस तरह भी कर सकते हैं अस्थमा से बचाव कोरोना को देखते हुए अस्थमा के रोगियों को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। ऐसे मरीजों को विटामिन सी युक्त फलों एवं सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए। इससे फेफड़े में होने वाली सभी परेशानियों से निजात मिलती है। इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। वरिष्ठ फिजीशियन डा. अरविंद डोगरा का कहना है कि अस्थमा के अधिकतर रोगी राहत के लिए इनहेलर का प्रयोग करते हैं। उसके प्रयोग के साथ अधिक से अधिक पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। इससे शरीर में मौजूद टॉक्सिन बाहर निकल जाते हैं। फेफड़े का तापमान भी संतुलित रहता है। सांस लेने में अधिक तकलीफ होने पर मरीज कभी-कभी राहत के लिए मुंह से सांस लेने लगते हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि मुंह से सांस लेने पर फेफड़ों की सूजन बढ़ सकती है। इसके साथ ही योगा भी मददगार साबित होता है। किसी खास प्रकार के आहार से एलर्जी हो तो उससे परहेज करना चाहिए। ---------------- पहले पंप और नेबुलाइजर दिन में कई बार लगानी पड़ती थी, लेकिन अब लॉकडाउन के दौरान प्रदूषण कम हुआ है। इसकी वजह से अब सांस लेने में तकलीफ नहीं होती है। राधेश्याम, नंदग्राम ----------------- दमा के मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। ज्यादातर मरीजों को उपचार के लिए अस्पताल भी नहीं आना पड़ा। ऐसे में मरीज अपने उपचार में लापरवाही न बरतें तो दवा के साथ शुद्ध हवा मिलने से दमा के रोग से छुटकारा मिल सकता
लॉक डाउन में प्रदूषण हुआ कम, दमा के मरीजों को मिली राहत